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Review - किसी की अंधेरी जिंदगी में उजाला लाने की कहानी है डियर माया

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2.5/5

कास्ट- मनीषा कोइराला, श्रेया सिंह चौधरी, मधिहा इमान
डायरेक्टर - सुनैना भटनागर
प्रोड्यूसर - शोभ यादव, संदीप लेजेल
लेखक -सुनैना भटनागर
शानदार पॉइंट -मनीषा कोइराला, कहानी
निगेटिव पॉइंट - फिल्म का धीमा नैरेशन
शानदार मोमेंट - जब माया (मनीषा कोइराला) अपनी अकेली जिंदगी को पीछे छोड़ चाट खाती हैं, वो सीन कई चीजें बयां करते हैं और मनीषा कोईराला इसमे परफेक्ट लगी हैं।

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प्लॉट

प्लॉट

बेस्ट फ्रेंड अना (मादिहा इमाम) और इरा (श्रेया सिंह चौधरी) हाई स्कूल की लड़कियां हैं जो शिमला में रहती हैं। बाकी टीनएज की तरह ये भी मस्ती करना, लड़कों के बारे में बात करना, चुपके चुपके रोमांटिक नॉवेल पढ़ना पसंद है।इन सब के बीच वो अना की एकांत में रहने वाली पड़ोस माया (मनीषा कोइराला) के बारे में बहुत दिलचस्पी लेती हैं। माया के साथी के नाम पर दो कुत्ते, और एक पिंज़ड़ा पक्षियों से भरा है। माया का यह व्यवहार उसके बचपन में हुई दुखद घटना के कारण है जिसका प्रभाव लंबे समय तक रह जाता है।जल्दी ही इरा के दिमाग में एक शैतानी भरा आइडिया आता है और दोनों सहेलियां मिलकर माया की अधेरी जिंदगी में उजाला लाना चाहती हैं। या इरा के शब्दों में कहें तो माया की जिंदगी में शाहरुख खान
लाना चाहती है।

प्लॉट

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इरा के उकसाने पर माया एक काल्पनिक शख्स वेद के नाम से माया को चिट्ठियां लिखने लगती हैं। चीजें भयानक रूप से तब बदल जाती है जब माया को बी वेद से प्यार होने लगता है जबकि उसे नहीं पता कि वो शख्स सिर्फ पेपर पर ही मौजूद है। वो अपने घर को बेचने की सोचती है और अपने लवर को खोजने निकल जाती है। अना की धीरे धीरे माया से बॉन्डिंग होने लगती है और उसे अपनी इस हरकत का पछतावा भी है। लेकिन इसके पहले कि वो माया के सामने अपनी गलती मान पाती माया चली जाती है। इस घटना का अना की जिंदगी पर और इरा के साथ दोस्ती पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। 6 साल बीत जाते हैं और अब अना दिल्ली में पढ़ाई कर रही होती है और माया को ढूंढती भी है। वहीं दूसरी ओर इरा को अपनी दोस्त को खोने का पछतावा भी है। क्या दोनों की दोस्ती होगी? माया कहां है?इन सवालों का जवाब आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा।

डायरेक्शन

डायरेक्शन

सुनैना भटनागर इम्तियाज अली को असिस्ट कर चुकी हैं और इम्तियाज अली के खास अंदाज की झलक इस फिल्म में भी देखने मिली है। उनके कैरेक्टर्स फिल्म में परफेक्ट नहीं है लेकिन परफेक्ट तो हम भी अपनी लाइफ में नहीं हैं। डियर माया खुद को और अपनी जिंदगी को फिर से तलाशने की कहानी है।फिल्म लगभग सकारात्मक पहलू दिखाने में कामयाब हो जाती है। फिल्म में कई सब
प्लॉट नहीं है।

परफॉर्मेंस

परफॉर्मेंस

मनीषा कोइराला सबसे बड़ी वजह है जो आपको आखिरी तक फिल्म से जोड़े रखेंगी। उनके डार्क सर्कल से लेकर जिंदगी में आशा की एक किरण तक वो अपनी परफॉर्मेंस में ला पाने में कामयाब रही हैं। डेब्यू करने वाली एक्ट्रेसेस श्रेया सिंह चौधरी और मादिहा इमाम ने भी अच्छी एक्टिंग की है लेकिन इमाम ध्यान खींचने में अधिक कामयाब होती हैं। और हां फिल्म में एक सरप्राइज कैमियो भी है।

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

आरती बजाज ने अच्छी एडिटिंग की है लेकिन फिल्म का धीमा नैरेशन फिल्म की कमी है। सयाक भट्टाचार्य की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है और कई सीन ऐसे हैं जो फिल्म के बाद तक आपके जेह्न में रहेंगे।

म्यूजिक

म्यूजिक

एलबम में से सात रंगो से सबसे बेहतरीन गानों में से एक है। रेखा भारद्वाज की आवाज में जब मनीषा कोइराला का दुबारा परिचय कुछ बेहद खूबसूरत विजुअल के साथ दिया जाता है तो आप बाकी बातें भूल जाएंगे। सुने साया और कहने दो भी गुनगुनाने लायक गाने हैं।

 Verdict

Verdict

डियर माया में कुछ कमियां जरूर हैं लेकिन फिल्म में बतान की कोशिश की गई है उसमें फिल्म सफल रही है। इसमें बताया है कि आशा कि एक किरण भी इतनी ताकतवर होती है कि उसकी मदद से बिना किसी सहारे के भी कोई आगे बढ़ सकता है।फिल्म में एक इंटरेस्टिंग कहानी है लेकिन फिल्म हर किसी के बस की बात नहीं है। जिन्हें थोड़ा एंटरटेनमेंट पसंद है उन्हें फिल्म नहीं अच्छी लग सकती है। बाकियों के लिए ये एक कारण हो सकती है कि आप अपनी लाइफ से फिर से बेइंतहा मोहब्बत करें।

English summary
Dear Maya movie Review story plot and rating, Know how the movie is,
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