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REVIEW: यहां किरदार नहीं.. कहानी सुपरस्टार है - 'अलीगढ़' (4 स्टार)

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4.0/5

[समीक्षा] कुछ फिल्में आपको अंदर तक झंझोर देती हैं। हंसल मेहता के निर्देशन में बनी फिल्म 'अलीगढ़' भी उन्हीं कहानियों में शामिल है। फिल्म 'अलीगढ़' भारत में सिनेमाघरों में आने से पहले ही काफी सुर्खियां बटोर चुकी है। फिल्म को मुंबई फिल्म फेस्टिवल, बुसान फिल्म फेस्टिवल और लंदन के फिल्म समारोह में भी दिखाया जा चुका है जहां इसकी जमकर सराहना की गई।

फिल्म की कहानी है अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉक्टर एस आर सिरस (मनोज बाजपेयी) की, जो पूरी यूनिवर्सिटी में एकमात्र मराठी पढ़ाने वाले प्रोफेसर हैं। लेकिन किस तरह एक घटना उनकी पूरी जिंदगी को बदल देती है.. इसकी कहानी है अलीगढ़.. सिहरन भरी, दर्द भरी.. कहानी, जो सवाल उठाती है। 

फिल्म की कहानी अपूर्व असरानी ने लिखी है और यकीन मानिए कि यह कहानी आपको आखिर मिनट तक अपनी सीट से हिलने नहीं देगी। कोई शक नहीं कि फिल्म देखने के बाद आपको खुद को बेबस और कमजोर महसूस करेंगे।

यहां पढ़े फिल्म अलीगढ़ की पूरी रिव्यू-

कहानी

अलीगढ़ की कहानी है प्रोफेसर श्रीनिवास सिरस की, जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मराठी के प्रोफेसर हैं। एक रात दो रिपोर्ट्स और चार प्रोफेसर सिरस के फर्स्ट फ्लोर अर्पाटमेंट चुपके से घुस आता हैं और कुछ ऐसा रिकॉर्ड कर बैठते हैं, जिससे प्रोफेसर की दुनिया उलट जाती है। दरअसल, प्रोफेसर एक मुस्लिम ऑटोवाले के साथ संबंध बना रहे होते हैं। प्रोफेसर इस घटना से हतप्रभ रह जाते हैं कि कोई इस तरह उनकी जिंदगी का मजाक कैसे बना सकता है।

कहानी

समलैंगिकता को गलत ठहराते हुए प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी से संस्पेंड कर दिया जाता है। इतना ही नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी उस टेप को मीडिया में भी रिलीज कर देती है। लिहाजा, प्रोफेसर की जिंदगी पूरी मीडिया की हेडलाइन बन जाती है। ऐसे में युवा पत्रकार दीपू सेबेस्टियन (राजकुमार राव) पूरे मामले की पड़ताल करता है। केस कोर्ट तक जाती है। अब कोर्ट से प्रोफेसर को इंसाफ मिल पाता है या नहीं.. यह देखने के सिनेमाघर तक जरूर जाएं।

अभिनय

प्रोफेसर के किरदार में मनोज बाजपेयी ने एक बार फिर दिखा दिया कि वे कितने उम्दा कलाकार है। प्रोफेसर सिरस का किरदार आपके आंखों में आंसू ला देगा.. जिसे देखक आप सिहर उठेंगे। वहीं, राजकुमार राव ने भी युवा पत्रकार के रूप में अच्छा योगदान दिया है। सिरस के वकील के किरदार में आशीष विद्यार्थी का किरदार भी आपको याद रह जाएगा।

निर्देशन

फिल्म का निर्देशन कमाल का है। हंसल मेहता ने कहानी को बहुत की मजबूती के साथ बुना है। यहां सवाल सिर्फ समलैंगिकता का नहीं, बल्कि समाज की सोच का है। फिल्म को रियल लोकेशन पर शूट किया गया है। लिहाजा कहानी की सच्चाई और बेहतरीन तरीके से सामने आती है।

संगीत

फिल्म में लता मंगेशकर के दो गीत हैं। जो कहानी के साथ जाते हैं और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है।

क्या है अच्छा!

मनोज बाजपेयी की बेहतरीन एक्टिंग के लिए.. हंसल मेहता के उम्दा निर्देशन के लिए.. और अपूर्व असरानी द्वारा लिखे गए आंखें खोल देने वाली कहानी के लिए.... यह फिल्म जरूर देंखे।

देखें या नहीं!

यह एक Must Watch फिल्म है.. असल जिंदगी से जुड़ी यह कहानी आपको इमोशनल कर जाएगी।

English summary
Read here, Aligarh movie review, featuring Manoj Bajpayee and Rajkummar Rao.
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