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अब युधिष्ठर, तब अनुपम खेर का विरोध क्यों

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नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) पुणे फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान में गजेन्द्र चौहान यानी महाभारत सीरियल के युधिष्ठर की नियुक्ति का योग्यता-अयोग्यता के आधार पर विरोध हो रहा है।

Why some forces oppose to the likes of Gajendra Chauhan and Anupam Kher?

पहले अनुपम खेर का भी विरोध हो चुका है। चौहान का विरोध करने वाले क्या इस बात का जवाब देंगे कि जब अनुपम खेर को कामरेड सुरजीत के कहने पर सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था, तब आपकी योग्यता का तर्क कहाँ चला गया था?

योग्य खेर

अब ये मत कह दीजियेगा कि अनुपम खेर योग्य नहीं थे। आप सब इसीलिए चुप थे न कि अनुपम खेर आपकी विचारधारा के पैरोकार नहीं थे। वह कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की बात करते थे और धारा 370 के खिलाफ बोलते थे।

पलटी बाजी

वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन कहते हैं कि साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, सिनेमा आदि से जुड़े सरकारी संस्थानों में "अपने लोग" बिठाने का खेल जिन लोगों ने शुरू किया था, आज बाज़ी पलट जाने पर हाय-तोबा मचा रहे हैं और योग्यता की दुहाई दे रहे हैं।

बवाल चालू

बता दें कि भाजपा सदस्य गजेन्द्र चौहान को एफटीआईआई का अध्यक्ष बनाए जाने पर बवाल शुरू हो गया है। चौहान की नियुक्ति के विरोध में पुणे इंस्टीट्यूट के छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।

चौहान की नियुक्ति के विरोध में एफटीआईआई के छात्रों ने क्लासेज का बायकॉट कर दिया। उन्होंने दीवारों पर चित्र और नारे लिखकर अपना गुस्सा जताया। उधर,छात्र यूनियन ने कहा कि अगर इस नियुक्ति पर रोक नहीं लगी तो विरोध और तेज किया जाएगा।

गलत विरोध

हालांकि राजधनी में वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल मानते हैं कि चौहान एक मंजे हुए कलाकार है। उनका इस आधार पर विरोध हीं होना चाहिए कि वे भाजपा के करीबी हैं। किसी भी इंसान की राजनीतिक प्रतिब्द्धता हो सकती है।

English summary
Why some forces oppose to the likes of Gajendra Chauhan and Anupam Kher? Both are ace actors. They faced opposition with any solid reason.
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