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#ClearHai: राखी सावंत की धज्जियां उड़ाओ...सलमान खान को देखना भी मत!

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WARNING: इस पोस्ट से हम यह कतई नहीं कहना चाहते हैं कि जो कुछ भी तन्मय भट्ट ने लता मंगेशकर के बारे में जो कहा वो सही है। हम बस इतना चाहते हैं कि आप सिक्के के दोनों पहलू देख कर स्टारडम की कीमत और उस पर मचे हो हल्ले को सही गलत ठहरा सकें!

तन्मय भट्ट और लता मंगेशकर की कंट्रोवर्सी ने बहुत ज़्यादा ही हंगामा मचा दिया है। सारी बात शुरू हुई एक स्नैपचैट वीडियो से। जहां तन्मय भट्ट ने लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर को लड़ते हुए दिखाया। इसके बाद पूरा बॉलीवुड बौखला गया।

लेकिन ये कहना है कि कॉमेडी करो पर एक लिमिट में क्या दोगलापन नहीं है? किसी की इज़्जत उतारने की भी क्या कोई लिमिट हो सकती है?

अगर इंसान राखी सावंत है तो आप उसकी इज़्जत उतार सकते हैं और अगर इंसान लता मंगेशकर है तो आप बेइज़्जती नहीं कर सकते?
[अगर हिम्मत है तो सलमान खान को छू कर दिखाओ"]  

अब बात बड़ी थी। क्यों थी? क्योंकि पहली बात तो तन्मय ने दो महान लोगों पर हाथ डाला। दूसरी बात उन्होंने उन पर पर्सनल कमेंट किए। तीसरी बात उनका वीडियो बेहद ही फूहड़ और बचकाना था।

लेकिन अब ज़रा सिक्के का दूसरा पहलू भी देख लेते हैं। यह पहली बार नहीं है कि जब किसी सेलिब्रिटी का मज़ाक उड़ाया गया है। इस बार अंतर सिर्फ इतना है कि पहली बार एक महान सेलिब्रिटी का मज़ाक उड़ाया गया और थोड़ा ज़्यादा फूहड़ ढंग से उड़ाया गया।

जानिए अब तक कितनी बुरी तरह बेइज़्जत किये जा चुके हैं कुछ स्टार्स -

 

इज़्जत की भी लिमिट?

आजकल एक चर्चा चल रही है कि बेइज़्जती की भी लिमिट होती है! क्या वाकई? अगर इंसान सलमान खान है तो आप उसकी बेइज़्जती नहीं कर सकते और अगर इंसान विवेक ओबेरॉय है तो आप एक लिमिट तक उसकी बेइज़्जती कर सकते हैं? सीधी सी बात है अगर आप किसी के सामने उन पर मज़ाक कर रहे हैं तो वो कॉमेडी है बाकी सब कुछ बेइज़्जती है!

जगजीत सिंह

हाल ही में कॉमेडियन सुदेश लाहिड़ी ने जगजीत सिंह की मिमिक्री की थी और अच्छे अंदाज़ में कतई नहीं की थी। क्या ये दिवंगत सिंगर की बेइज़्जती नहीं थी?

जावेद अख्तर

जावेद अख्तर के बोलने के अंदाज़ पर हमेशा कॉमेडी सर्कस पर तमाम दफा एक्ट किए गए हैं। उनके थूक से लेकर शब्द तक पर। इसे इंसल्ट नहीं कहा जाता है? आप भारत के बेस्ट लेखक और शायर के बारे में बात कर रहे हैं।

लता मंगेशकर

सुगंधा शर्मा ने लता मंगेशकर की मिमिक्री कर के ही अपना करियर बनाया है। वो फेमस होने के बाद सारेगामापा में प्रतिभागी बनकर आई थीं लेकिन उनसे खास कुछ हो नहीं पाया और वो वापस वही करने लगीं जो उन्हें आता था, नकली लता मंगेशकर बनना? क्या ये वाजिब था?

कीकू शारदा

कोई इंसान कैसा भी हो उस पर टिप्पणी देने का मज़ाक उड़ाने का हक हमें नहीं है। गुरमीत राम रहीम सिंह जैसे भी रहें उनकी अपनी मर्ज़ी वो उनका हक है। तो इसका मतलब कि हमें उनकी बेइज़्जती का हक मिल गया? कमाल की बात ये है कि कुछ दिन पहले जब कीकू शारदा को इसी लिए अरेस्ट किया गया था तो हर कोई उनके साथ खड़ा था।

कपिल शर्मा

कपिल शर्मा आज बहुत बड़े स्टार हैं लेकिन जब वो एक नॉर्मल कॉमेडियन थे तो उन्होंने कितने एक्ट केवल शेखर सुमन पर चुटकुले बना बना कर निकाले हैं! लेकिन तब जब शेखर सुमन शो छोड़ चुके थे। क्या ये बेइज़्जती के दायरे के बाहर था?

हिमेश रेशमिया

टोपी से लेकर नाक से गाने तक हिमेश रेशमिया की लगभग हर कॉमेडियन ने बेइज़्जती की है। उस इंसान की जिसने म्यूज़िक इंडस्ट्री में ऐसा तहलका मचाया था कि सबकी कुर्सी हिल गई थी। सोनू निगम का भी बहुत ही गंदा एक्टिंग रिकॉर्ड है लेकिन आज तक उनका मज़ाक क्यों नहीं उड़ाया किसी ने?

अनु मलिक

अनु मलिक 90 के दशक के बादशाह थे। उनके गाने आपने भी गाए हैं और हमने भी लेकिन क्या अभिजीत सावंत जैसे इंसान को ये हक मिल गया कि वो किसी भी कॉमेडी शो में जाकर अनु मलिक की बेइज़्जती करे?

राखी सावंत

सीधे सीधे सच और खरी बात बोलते हैं। राखी सावंत को आज तक इज़्जत मिली ही नहीं। ना वो ज़्यादा पढ़ी लिखी हैं ना ही उनके पास इतना दिमाग हैं। तो इसका मतलब है कि उनकी हर हरकत का कोई भी मज़ाक उड़ा सकता है। उनकी इंग्लिश से लेकर पहनावे तक का! क्योंकि वो राखी सावंत है...छोटी है...आईटम स्टार है?

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