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#FactReview: प्रिय अज़हर, 99 पर आउट होने वाला कभी हीरो नहीं होता!

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इमरान हाशमी स्टारर अज़हर रिलीज़ हो चुकी है और टोनी डीसूज़ा की इस फिल्म का पूरा रिव्यू हम दे चुके हैं। लेकिन फिर भी कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो आपको थोड़ा परेशान कर जाती है। अज़हर आपको, खासतौर से क्रिकेट प्रेमियों को परेशान करेगी। जैसा कि अज़हर खुद कहते हैं कि 99 पर आउट होने वाले को कोई याद नहीं रखता! ऐसी ही कुछ ये फिल्म भी है।

मोहम्मद अज़हरूद्दीन 90 के दशक में कप्तान बन क्रिकेट के आसमान पर चमक गए। और शायद यही कारण था कि उनकी ज़िंदगी में लोगों को काफी दिलचस्पी हुई होगी। और उन पर बायोपिक बनाना शायद बहुत ही शानदार अवसर था क्योंकि ज़िंदगी के सारे अच्छे बुरे अनुभव उनके पास थे।
[क्यों देखें और क्यों ना देखें अज़हर]

अज़हरूद्दीन की ज़िंदगी एक ग्रे शेड का बेहतरीन उदाहरण थी - एक शानदार करियर, एक सफल क्रिकेट कप्तान, एक खुशहाल परिवार और फिर एक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर, एक आलीशान लाइफस्टाइल की आदत और मैच फिक्सिंग का आरोप!

इतने के बावजूद अज़हरूद्दीन की बायोपिक में ऐसा कुछ सामने नहीं आया जो दिल को छू जाए या सनसनीखेज़ हो। माना कि फिल्म का उद्देश्य अज़हरूद्दीन को हीरो बनाने का नहीं था पर वो एक बेचारे आदमी के अलावा फिल्म में कुछ नहीं बन पाए।

जानिए वो राज़ जिन पर से परदा उठते उठते रह गया -

पैसे लिए या नहीं

पैसे लिए या नहीं

बायोपिक का मुद्दा ये था कि अज़हर ने पैसे लिए थे या नहीं। और फिल्म में साफ हो जाता है कि अज़हर ने पैसे लिए थे लेकिन उन पैसों का क्या हुआ और किस तरह हुआ ये बहुत ही बचकाना था।

सलमान इफेक्ट

सलमान इफेक्ट

संगीता बिजलानी के बारे में कहा जाता है कि वो सलमान से निकलने के लिए अज़हर पर अटक गई थीं। लेकिन जिस तरह से अज़हर और संगीता बिजलानी का एंगल फिल्म में दिखाया गया है उसमें सलमान खान का कम और संगीता बिजलानी का हाथ ज़्यादा नज़र आता है।

 प्यार या परिवार

प्यार या परिवार

अज़हर ने प्यार के लिए परिवार छोड़ा था लेकिन फिल्म में इस बात को इतने हल्के तरीके से दिखाया गया है जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं। वो भी तब जब अज़हर नौरीन से बेहद प्यार करते हैं...Weird!

इतने बेचारे

इतने बेचारे

अज़हरूद्दीन भारतीय क्रिकेट के कप्तान थे। इस लिहाज़ से फिल्म में ड्रेसिंग रूम पॉलिटिक्स से लेकर मैदान की आग तक सब कुछ होना चाहिए था। लेकिन फिल्म देखकर आपको एहसास होगा कि क्या वाकई अज़हर इतने बेचारे थे।

क्यों नहीं थे दोस्त

क्यों नहीं थे दोस्त

अज़हरूद्दीन 100 करोड़ लोगों के कप्तान थे क्योंकि क्रिकेट इस देश का धर्म है। फिर भी इतने बड़े आरोप से बचाने को एक इंसान सामने नहीं आया।ना कोई दोस्त, ना कोई परिवार ना ही कोई फैन!

क्यों नहीं बोला सच

क्यों नहीं बोला सच

इस फिल्म में कई बार अज़हर ने मनोज प्रभाकर के बारे में काफी राज़ खोले हैं लेकिन असल ज़िंदगी में ऐसा कितना हुआ। फिल्म में अज़हर ने खुलकर कहीं नहीं बोला कि उनके साथ फरेब किया किसने! इतना डर किस बात का!

बैन के समय क्या किया

बैन के समय क्या किया

अज़हर की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू होना चाहिए था बैन। उन्होंने बैन के वक्त क्या किया। ज़िंदगी में क्या हुआ? परिवार में क्या हुआ? वो कितना टूटे और कितना बिखरे!

कितना दुख सहा

कितना दुख सहा

क्या अज़हर ने दुख सहा? ज़िल्लतें सहीं? किस किस्म की? वो एक मुस्लिम थे तो क्या उनके मज़हब पर सवाल उठा? उन्हें पाकिस्तानी कहा गया? पाकिस्तान भेजने की नुमाइशें की गईं? फिल्म में एक भी पहलू नहीं है

क्यों नहीं किया वकील

क्यों नहीं किया वकील

अज़हर अपने बेस्ट फ्रेंड के हाथ में अपना केस थमा देते हैं। जिनके पास ना लड़ने का मन था और ना ही जज़्बा। उन्होंने वकील क्यों नहीं किया। उन्हें खुद पर से इल्ज़ाम हटाने में दिलचस्पी नहीं थी बस लोगों की नज़र में अपना नज़रिया बदलना था। लेकिन सब कुछ फिल्म में यूं ही छोड़ दिया गया!

पूरा रिव्यू

पूरा रिव्यू

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फिल्म देखने से पहले पढ़िए अज़हर का रिव्यू---> देश को बेचा या खुद बिका...ये रहा फैसला!

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