खामोशियां (A)

पाठकों द्वारा समीक्षा

रिलीज़ डेट

30 Jan 2015
कहानी
खामोशियां प्रेम त्रिकोण पर आधारित कहानी है जो कि एक लेखक के इर्द-गिर्द घूमती है और वो भटकते हुए कश्मीर की बर्फीली ढलानों में पहुंच जाता है जहां उसे एक लड़की के बारे में पता चलता है तो वह आश्‍चर्य में पड़ जाता हैा

कहानी विस्तार से-
युवा लेखक कबीर (अली फजल) अपनी एक किताब के बाद खो जाता है। वो अपने आप को जानने के लिए एक प्रेरणादायक यात्रा पर है और उसे अपनी किताब लिखनी है। वह एक जवान और खूबसूरत लड़की जिसका नाम मीरा (सपना पब्बी) है, से मिलता है जो एकांत सा गेस्ट हाऊस चलाती है जिसे देखकर वह भयभीत हो जाता है।

मीरा की शादी गेस्ट हाऊस के मालिक जयदेव (गुरमीत) से हो चुकी है जो कि कभी एक पेपर मिल का मालिक था। वो अपने आप को काफी आर्कषक पुरूष मानता है लेकिन भीतर से वह एक दानव की तरह है।
कबीर का सामना असामान्य सी चीजों से होता है और घर और मीरा के रहस्यों को खोजता है।

इन संदिग्ध घटनाओं को मीरा टाल जाती है क्योंकि अगर कबीर को इस बारे में पता चला तो वह उसे खत्म करने की धमकी देगा। इन असामान्य घटनाओं को लेकर जितना कबीर मीरा से बातचीत करता है, उतना ही ज्यादा वह उसकी ओर आर्कषित होता जाता है। वो कौन से राज हैं जो कि उसकी खामोशी में छिपे हुए हैं?
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