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EXCLUSIVE: रईस- काबिल की सफलता को एन्जॉय कर रहा हूं- नरेन्द्र झा

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रईस के 'मूसा भाई' हों या काबिल के 'चौबे जी'.. दबंग आवाज लिए एक्टर नरेन्द्र झा दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बेबस कर देते हैं। दोनों फिल्मों का हिस्सा रहे यह एक्टर हर फिल्म के साथ बॉलीवुड में अपनी अहम जगह बना रहे हैं। हैदर, घायल वन्स अगेन, मोहनजोदड़ो, फोर्स 2, रईस, काबिल.... उम्मीद है इस लिस्ट में और भी शानदार फिल्में जुड़ेंगी।

[यहां पढ़ें- इंटरव्यू के दौरान गोविंदा ने सलमान से लेकर डेविड धवन पर की चर्चा]

बहरहाल, रईस- काबिल बॉक्स ऑफिस हिट हो चुकी है। दर्शकों ने दोनों ही फिल्मों को पसंद किया है। तो ऐसे मौके पर फिल्मीबीट ने एक्टर नरेन्द्र झा से खास बातचीत की। जिसके दौरान उन्होंने अपनी आने वाली फिल्मों के साथ साथ बॉलीवुड की कई पहलुओं पर चर्चा की।

घंटे भर की दिलचस्प बातचीत को हमने शब्दों में परोसा है। यहां पढ़ें इंटरव्यू के कुछ प्रमुख अंश-

रईस- काबिल.. दोनों फिल्मों में काम करने का अनुभव

रईस- काबिल.. दोनों फिल्मों में काम करने का अनुभव

दोनों फिल्मों में काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा। दोनों बड़े स्टार्स के साथ काम करना अच्छा रहा। अब जबकि दोनों फिल्में सफल रही हैं, ऐसा लग रहा है स्टार्स के काम करना फायदेमंद रहा। बतौर सर्पोटिंग एक्टर जब आप बड़े सितारों के साथ काम करना शुरु करते हैं, जो जाहिर है आपकी पहुंच ज्यादा दर्शकों तक बनती है। लोग आपको नोटिस करना शुरु करते हैं। लिहाजा, फिलहाल मैं इस लम्हे को एन्जॉय कर रहा हूं क्योंकि दोनों फिल्में हिट रही हैं।

यदि आपने अच्छा काम किया है तो लोग आपको अप्रोच करेंगे

यदि आपने अच्छा काम किया है तो लोग आपको अप्रोच करेंगे

जो काम मेरे सामने आता है, मैं वो करता हूं। मैं कभी काम मांगने नहीं जाता हूं। मेरा मानना है कि जब आप अच्छा काम करते हैं, तो उसे पहचान मिलती ही है। यह स्वाभाविक है। यदि आपने अच्छा काम किया है, अच्छे स्टार्स के साथ काम किया है तो आप फिल्ममेकर्स की नजर में आएंगे। यह एक तरह का एवार्ड है। तो ऐसा अब लग रहा है कि इन फिल्मों (हैदर, घायल वन्स अगेन, रईस, काबिल ) का कुछ असर हो रहा है।

आने वाली फिल्मों पर चर्चा

आने वाली फिल्मों पर चर्चा

मेरी एक फिल्म है 2016 द एंड, जिसका निर्देशन किया है जयदीप चोपड़ा ने। फिल्म जनवरी में आने वाली थी। लेकिन किसी कारणवश फिल्म पोस्टपोंड हो गई है और अब वह मार्च में रिलीज होगी। वहीं, दूसरी फिल्म आ रही है 'विराम', जहां मैं मेनलीड एक्टर हूं। इनके अलावा दो फिल्में और हैं, लेकिन उनमें कुछ काम अभी बचा है। लिहाजा, उनके बारे में फिलहाल मैं चर्चा नहीं करूंगा।

'हैदर' ने बदली है छवि

'हैदर' ने बदली है छवि

सच कहा जाए तो, हैदर से पहले फिल्म इंडस्ट्री मुझे ज्यादा पहचानती नहीं थी। क्योंकि मैं टेलीविजन किया करता था। मैंने ज्यादा फिल्में भी नहीं की थीं। मैंने फंटूश, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी फिल्में की थी। लेकिन कोई ऐसी फिल्म नहीं की थी, जिसपर हुई चर्चा हो। इत्तिफाक की बात है कि मैंने 'हैदर' में काम किया। उस संयोग का परिणाम है कि हैदर में क्रिटिक ने मेरे काम को पसंद किया, मुझे थोड़ी पहचान मिली।

टेलीविजन पर कब होगी वापसी

टेलीविजन पर कब होगी वापसी

सच कहूं तो टेलीविजन वाले थोड़े नाराज़ हैं। टेलीविजन के साथ ऐसा है कि आप बंध जाते हैं। मुझे कई बार कुछ किरदार काफी आकर्षित करते हैं, जो छोटे हों। लेकिन टीवी में यदि आपका ट्रैक हिट हो गया तो आपका किरदार को 6 महीनों तक भी बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में यदि आपने फिल्म ने किसी प्रोड्यूसर को डेट दी हुई है, तो यहां मुसीबत हो जाती है।

बॉक्स ऑफिस क्लैश – सही या गलत

बॉक्स ऑफिस क्लैश – सही या गलत

दो बड़ी बड़ी फिल्में.. बड़े बैनर की फिल्में, जिन्हें इतने बेहतरीन सब्जेक्ट पर बनाया गया हो। बेहतर तो यही होता यदि ये अलग अलग रिलीज होतीं। दर्शकों को आज भी बैक टू बैक फिल्में देखने में परेशानी होती है। टिकट काफी मंहगी हो चुकी है। ऐसे में यदि आप परिवार के साथ फिल्म देखने जाते हैं तो दो फिल्में एक साथ देखना नामुमकिन सा है। लिहाजा, इसका असर तो पड़ता है।

आज यदि दो फिल्मों ने मिलाकर 500 करोड़ का बिजनेस किया है.. तो हो सकता है एक ही फिल्म 250-300 करोड़ का बिजनेस कर लेती। लेकिन कहीं ना कहीं इस क्लैश से मुझे फायदा मिल गया.. लोगों ने मुझे दोनों फिल्मों को देखा, ध्यान दिया, तुलना की.. तो मेरे लिए यह फायदेमंद रहा। लेकिन सही वही होता, यदि फिल्में अलग अलग रिलीज होती।

फिल्में साइन करते वक्त किरदार कितना अहम

फिल्में साइन करते वक्त किरदार कितना अहम

मैं देखता हूं कि रोल कैसा है, कितना लंबा है.. किरदार कितना प्रभाव छोड़ता है.. वह फिल्म की कहानी को आगे ले जाने में कितना सशक्त है। कई बार आपको फिल्म से जुड़े लोगों को भी देखना पड़ता है।

टेलीविजन से फिल्म तक का सफर

टेलीविजन से फिल्म तक का सफर

बहुत लंबी है.. मैंने पचासों सीरियल किया है। इत्तिफाक से मुझे ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा। इस क्षेत्र में आते ही मुझे मॉडलिंग का काफी काम मिला। मैंने सौ डेढ़ सौ एड फिल्म्स की होंगी। फिर जब टेलीविजन का दौर शुरु हुआ तो सिलसिला चलता गया। मेरे लिए एक्टिंग मतलब एक्टिंग थी। इसीलिए शायद फिल्मों में मैंने लेट एंट्री ली। लेकिन जिंदगी मेरे लिए आसान रही.. सफर अच्छा रहा..

English summary
In an exclusive interview with Filmibeat, Narendra Jha talked about Raees- Kaabil success and much more.
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