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एक फिल्म..कइयों ने किया नापसंद..लेकिन सीख सकते थे ये खास बातें!

Written by: Shweta
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करण जौहर बॉलीवुड के ऐसे डायरेक्टर हैं जो किसी भी विषय पर शानदार फिल्में बना डालते हैं। कुछ कुछ होता है और कभी खुशी कभी गम के बाद उन्होंने एक और फिल्म बनाई थी जिसमें कई बड़े स्टार्स थे जैसा करण जौहर की फिल्मों में होता है। 

जी हां हम बात कर रहे हैं कभी अलविदा ना कहना की। फिल्म रिलीज हुए आज 10 साल हो गए और अमिताभ बच्चन से लेकर करण जौहर और अभिषेक बच्चन ने फिल्म को सोशल मीडिया पर याद किया। कभी अलविदा ना कहना टिपिकल बॉलीवुड फिल्मों से अलग थीं।

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फिल्म का कॉन्सेप्ट ऐसा था कि फिल्म विदेशों में बहुत पसंद किया गया लेकिन भारत में कुछ खास लोगों ने पसंद नहीं कियाष इसके पीछे भले ये तर्क दिया गया की भारतीय दर्शकों की सोच अभी तक वैसी नहीं हुई है की वो शादी के बाद अफेयर जैसी चीजों को पचा पाएं। 

लेकिन असलियत में देखा जाए तो फिल्म कई छोटी-बड़ी बातें सिखा गई थी।जब फिल्म में शाहरूख खान, अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा एक साथ मिल जाएं तो फिल्म देखने में तो वैसे ही मजा आ जाता है और कुछ अच्छा ही होता है। देखिए जिंदगी से जुड़ी कई बातें फिल्म सिखा गई।

जबरदस्ती शादी नहीं..

जबरदस्ती शादी नहीं..

रानी मुखर्जी अभिषेक बच्चन से सिर्फ इसलिए शादी करती हैं क्योंकि वो उनके दोस्त होते हैं और अमिताभ बच्चन रानी मुखर्जी का पालन किए होते हैं। यहां रानी मुखर्जी की एक नासमझी की वजह से कईयों को भुगतना पड़ता है।

जिंदगी में बहुत कुछ होता है

जिंदगी में बहुत कुछ होता है

जिंदगी में सिर्फ एक चीज नहीं होता जिसे हम पकड़ कर रहें। शाहरूख खान एक्सिडेंट के बाद काफी बदल जाते हैं। लेकिन जिंदगी में कभी कुछ मन मुताबिक ना हो तो भी जिंदगी जीने का ढंग बदल नहीं लेना चाहिए।

हर पल जी भर जियो

हर पल जी भर जियो

अमिताभ की तरह उम्र डलने के बाद हर किसी को अपनी जिंदगी अपने तरीके से इंज्वॉय करनी चाहिए।

इगो साइड में..

इगो साइड में..

भले दोनों में से कोई भी ज्यादा पावरफुल हो लेकिन पैसा और पावर कभी रिलेशनशिप के बीच में नहीं आना चाहिए।

बच्चों पर Frustration नहीं..

बच्चों पर Frustration नहीं..

कभी भी पैरेंट्स को अपना Frustration अपने बच्चों पर नहीं निकालना चाहिए।

पैरेंट्स बीच में नहीं..

पैरेंट्स बीच में नहीं..

कभी भी पैरेंट्स को बीच में नहीं आना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए की मामले के खुद ही बात करके खत्म कर देना चाहिए।

इग्नोर नहीं करना..

इग्नोर नहीं करना..

कभी भी प्रॉब्लम शुरू हो तो इग्नोर नहीं करना। शुरूआत से ही बात करके कोई रास्त निकालना।

English summary
It has been 10 years of Kabhi alvida na kehna, see the life lessons that movie gave.
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