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बोर्ड एक्ज़ाम में करना है टॉप तो बच्चों को कतई ना देखने दें ये फिल्में

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इस हफ्ते सिनेमाघरों में चॉक एन डस्टर रिलीज होने वाली है। फिल्म दो टीचर्स और उनके स्टूडेंट्स के बीच की बॉन्डिंग के बारे में है। ऐसी लीक से हटकर फिल्मों को बनाना अपने आप में बड़ा रिस्क होता है क्योंकि दर्शक को भांपना और उनकी नब्ज को पहचानना आसान नहीं होता।

[''लोग सोचते हैं मैं अच्छा इंसान नहीं हूं और गुस्सा करते हैं!'']

किसी स्टूडेंट और टीचर के रिश्ते पर आधारित फिल्म काफी समय बाद पर्दे पर आ रही है।
फिल्म में जूही चावला, शबाना आज़मी और दिव्या दत्ता लीड रोल में हैं। फिल्म क्या कमाल दिखा पाती है ये तो रिलीज के बाद पता चलेगा। वैसे अब बोर्ड एक्जाम नजदीक आ रहे हैं तो जो बच्चे एक्जाम देने वाले हैं वो फिल्मों से दूर रहे और टीचर्स की बात माने तो ज्यादा अच्छा होगा।

पहले भी बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्मे बन चुकी हैं जो देश की शिक्षा व्यवस्था पर, टीचर और स्टूडेंट के रिश्तों पर बनी थी। कुछ को दर्शकों ने पसंद किया तो कुछ को रिजेक्ट।ऐसी फिल्मों में 3 इडियट और तारे जमीन पर छोड़ दें तो ज्यादातर फिल्में फ्लॉप रहीं या औसत कमाई की।

[एक फ्लॉप फिल्म की कीमत...तुम क्या जानो खान बाबू!]

आइये ऐसी हीं कुछ फिल्मों पर नजर डालते हैं जो इस विषय पर बनी

(नोट-बोर्ड एक्जाम देने वाले बच्चों को फिल्मों से दूर रखें)

चॉक एन डस्टर

चॉक एन डस्टर दो टीचर्स की उनके स्टूडेन्ट्स के साथ रिलेशिनशिप पर आधारित कहानी है। फिल्म 15 जनवरी को पर्दे पर आएगी।

तारे जमीन पर

तारे जमीन पर एक स्टूडेंट और टीचर पर बनी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है। ये फिल्म ना सिर्फ रिश्ते पर थी बल्कि एक टीचर का पढ़ाने को लेकर क्या नजरिया होना चाहिए इस पर बनी थी।

3 इडियट्स

जो काम करने में तुम्हारा मन लगे वो करो..सफलता झक मारकर तुम्हारे पीछे आएगी। 3 इडियट्स भी देश की शिक्षा पद्धति पर कई सवाल उठाती फिल्म है खासकर मार्क्स सिस्टम और स्टूडेंट्स पर इसके दबाव को लेकर।

आरक्षण

आरक्षण एज्यूकेशन में कास्ट बेस्ड रिर्जवेशन पर कई सवाल उठाती है और साथ ही सरकारी नौकरियों में कई बार इसकी वजह से कई बार टैलेंटेड लोगों को मौका नहीं मिल पाता।

स्टेनली का डब्बा

स्टेनली का डब्बा भी ऐसी ही फिल्म है जो एक ऐसे अनाथ स्टूडेंट की कहानी है जिसे एक खडूस टीचर परेशान करता है और वहीं कई टीचर्स उसे प्यार करते हैं।

रॉकफोर्ड

रॉकफोर्ड एक बोडिंग स्कूल की कहानी है और फिल्म में दरअसल फिल्म में रॉकफोर्ड एक ब्यॉय स्कूल है जिसमें स्टूडेंट्स की कहानी दिखाई गई है।

पाठशाला

पाठशाला में शाहिद कपूर एक ऐसे टीचर की भूमिका में हैं जो स्कूल मैनेजमेंट के गलत निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं ।

जागृति

1954 में बनी इस फिल्म में भी बोर्डिंग स्कूल और उसमें टीचर कैसे हॉस्टल में रह रहे स्टूडेंट्स जो अपने मां-बाप से दूर रहता है उनको दिखाया गया है।

स्कूल मास्टर

1959 में कन्नड़ फिल्म की रीमेक स्कूल मास्टर एक टीचर की कहानी जो ऐसे स्कूल में जाता है जहां के टीचर्स हीं पढ़ाने में ज्यादा ध्यान नहीं देते और उनको रास्ते पर लाना स्कूल मास्टर के बड़ी लिए समस्या होती है।

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English summary
In India many movies were made on education system and which depict the relationship of teacher and student. These movies created awareness in the society.
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