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SCORE CARD: एयरलिफ्ट में अक्षय कुमार Vs बजंरगी भाईजान में सलमान खान

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अक्षय कुमार की एयरलिफ्ट रिलीज़ हो चुकी है और फिल्म देखने के बाद आपको यकीन ही नहीं होगा कि एक इंसान कैसे फिल्म को हीरो बना सकता है। और वाकई इस फिल्म को आप बस देखते रह जाएंगे बिना पलक झपकाए।

और हमने एक बार फिर ऐसी फिल्मों पर रिसर्च करना शुरू की जिसमें एक कॉमन आदमी रातोंरात हज़ारों लाखों लोगों का हीरो बन गया। और अगर हमें कोई याद आया तो वो थे बजरंगी भाईजान - हमारे बजरंगी भाईजान, पाकिस्तान के बजरंगी भाईजान सबके बजरंगी भाईजान।
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लेकिन आपको एक दिलचस्प बात बताने का मन कर गया, वो ये कि एयरलिफ्ट में आपको अक्षय कुमार का नाम इतना याद नहीं रहेगा जितना फिल्म का। बात को ज़्यादा नहीं घुमाते हैं।


दरअसल, बजरंगी भाईजान और एयरलिफ्ट में ट्रीटमेंट के स्तर पर काफी ज़्यादा समानताएं थीं इसलिए हमें लगा कि एक स्कोर कार्ड तो होना ही चाहिए। तो बस कुछ मुद्दों पर हमने दोनों फिल्मों की तुलना की है। रिज़ल्ट आप खुद तय करिएगा -

दो कॉमन आदमी

दो कॉमन आदमी

दोनों ही फिल्में एक कॉमन आदमी पर थी। बजरंगी भाईजान एक नॉर्मल कॉमन आदमी था वहीं रंजीत कात्याल एक अमीर लेकिन कॉमन बिज़नेसमैन। क्योंकि ऐसे कितने ही अमीर हर देश में हैं।


एक मुश्किल

एक मुश्किल

रंजीत कात्याल को रातोंरात एक मुश्किल समझ में आती है और वो उससे खुद निकलने के रास्ते ढूंढता है। उसे केवल अपनी चिंता और वो मुश्किल से छुटकारा चाहता है। ऐसा ही कुछ बजरंगी के साथ भी था, वो केवल मुन्नी से पीछा छुड़ाना चाहता था, उसे मुन्नी के घर में कोई इंटरेस्ट नहीं था।


 BEFORE VS AFTER

BEFORE VS AFTER

अपने ड्राईवर को सामने मरता देख रंजीत कात्याल को लगता है कि उसकी पहचान केवल हिंदुस्तानी हैं और वो अपने साथ 1 लाख 70 हज़ार की मदद करता है। लेकिन बजरंगी के साथ कुछ उल्टा था। मुन्नी को ऑलमोस्ट बेचने के बाद उसे Guilt होता है, और फिर वो उसे घर पहुंचाने की ठानता है।


मसीहा आदमी

मसीहा आदमी

रंजीत कात्याल के कैरेक्टर में कहीं भी हीरो के गुण नहीं दिखाए गए। वो एक कॉमन आदमी था जिसने गलतियां की, उनसे सीखा, अपने साथ लोगों को जो़ड़ा और एक कामयाब मिशन बनाया। लेकिन बजरंगी भाईजान एक मुन्नी को पाकिस्तान पहुंचा आए...बिना किसी की मदद के...वो मसीहा ही रहे होंगे।


मुश्किल पर मुश्किल

मुश्किल पर मुश्किल

बजंरगी और रंजीत दोनों ने मुश्किलों का सामना किया। लेकिन रंजीत ने मुश्किलों के हल नहीं निकाले...उसने वो आदमी ढूंढे जो हल निकाल सके, क्योंकि वो नॉर्मल था। लेकिन बजरंगी बिना किसी की मदद के बॉर्डर पार कर, तार के नीचे से...मुन्नी को घर पहुंचा आए...मसीहा इफेक्ट!


गलतियां पर सीखना

गलतियां पर सीखना

रंजीत अपनी गलतियों से सीखता है और धीरे धीरे उन्हें दूर करता है। कभी वो सफल हुआ कभी बुरी तरह असफल हुआ। लेकिन बजरंगी ने कोई गलतियां की ही नहीं, उनके साथ बस सब होता चला गया और पाकिस्तान में वो बिना पासपोर्ट के एक बच्ची को छोड़ आए! wow!


डर, परेशानी सब थी

डर, परेशानी सब थी

अक्षय कुमार का रंजीत वाकई रियल है - उसमें डर है, परेशानी है, नाउम्मीदी है। उसके पास रास्ते नहीं है और वो निकालने की कोशिश कर रहा है तब वो फाइनल प्लान पर पहुंचता है। लेकिन बजरंगी के पास मुश्किल, परेशानी थी पर रास्ते ढूंढने की बजाय वो मुन्नी सहित उन परेशानियों में कूद गए....बजरंगी का नाम लेकर!


 रोमांस था पर नहीं

रोमांस था पर नहीं

रंजीत के पास रोमांस का वक्त नहीं था लेकिन फिर भी एयरलिफ्ट में एक पति - पत्नी के बीच के रिश्ते को मुश्किल की घड़ी में खूबसूरती से दिखाया है। लेकिन बजरंगी भाईजान में करीना का एंगल क्या था शायद ही किसी को समझ आया!


हिंदुस्तानी? कहां था

हिंदुस्तानी? कहां था

रंजीत की कहानी कहीं से भी रंजीत को हीरो नहीं बनाती पर हिंदुस्तान को बनाती है। ऐसा नहीं था कि उसकी मुश्किल कोई समझ रहा था पर उसने समझाने की कोशिश की क्योंकि हल हिंदुस्तान था। लेकिन बजरंगी की परेशानी ना हिंदुस्तान - पाकिस्तान ने समझी ना उसने समझाने की कोशिश की। बस अचानक से उसका साथ देने कुछ लाख लोग बॉर्डर तक चले आए!


English summary
Akshay Kumar in Airlift versus Salman Khan in Bajrangi Bhaijaan - which hero was normal and sane?
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